बिना सिक्योरिटी जमा कराये दे दिया करोड़ो का ठेका

मेडिकल यूनिवर्सिटी 150 करोड़ की राशि पर कुलपति की नजर, कुलाधिपति के संज्ञान में है मामला

जबलपुर/न्यूज लाइफ/ऑनलाइन। म.प्र. आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर में वर्तमान कुलपति, डाॅ. टी. एन. दुबे के कार्यकाल में अराजकता अपने चरम पर है और भ्रष्टाचार की नित नई परतें खुल रही हैं। इसी कड़ी में अब ए मेडिकल युनिवर्सिटी में अब एण्ड टू एण्ड परीक्षा का कार्य करने वाली कंपनी माईंडलाॅजिक्स के साथ सांठ-गांठ करके कुलपति डाॅ. टी. एन. दुबे और परीक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर की शर्तों का खुला उल्लंघन करने पर भी माईंडलाॅजिक्स कंपनी को करोड़ों रूपयों का अवैध भुगतान करने का एक नया मामला सामने आया है।

गौरतलब है कि माईंडलाॅजिक्स कंपनी मेडिकल यूनिवर्सिटी के परीक्षा कार्य के लिये अयोग्य है क्योंकि माईंडलाॅजिक्स कंपनी के विरूद्ध डाॅ. बी. आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में की गई अनियमितता के लिये एफ.आई.आर. दर्ज की जा चुकी है। माईंडलाॅजिक्स कंपनी द्वारा अपने निविदा प्रपत्र में आगरा में दर्ज एफ.आई.आर. की जानकारी को जानबूझकर छुपाते हुये मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर के कार्य का ठेका हासिल किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस तथ्य की जानकारी प्राप्त होने के बाद भी माईंडलाॅजिक्स कंपनी का ठेका यूनिवर्सिटी द्वारा रद्द नहीं किया गया है। माईंडलाॅजिक्स कंपनी से मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा प्रतिवर्ष 2.5 करोड़ रूपये का कार्य कराया जाता है। टेंडर की शर्त के मुताबिक माईंडलाॅजिक्स कंपनी के द्वारा एक परीक्षा चक्र के कार्य लागत का 10 प्रतिषत अर्थात रूपये 25 लाख सिक्योरिटी डिपोजिट के रूप में कार्यादेश के तीस दिन की अवधि में यूनिवर्सिटी में जमा किया जाना अनिवार्य था।

डिपोजिट जमा नहीं करने पर रद्द होना था टेंडर-
टेंडर  की शर्त के अनुसार रूपये 25 लाख सिक्योरिटी जमा नहीं होने की स्थिति में टेंडर अमान्य हो जाना चाहिये था। 2.5 करोड़ के काम में कम्पनी का खर्चा मात्र 25 – 30 लाख के लगभग ही होता है इससे अंदाज लगाया जा सकता है कमीशन खोरी की रकम का माईंडलाॅजिक्स कंपनी द्वारा कुलपति डाॅ. टी.एन. दुबे के साथ सांठ गांठ करके टेंडर अनुबंध के दो साल बाद भी अभी तक 25 लाख रूपये सिक्योरिटी डिपोजिट के लिये जमा नहीं करके टेंडर की शर्त का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन किया जा रहा है। निविदा की शर्त में किये गये प्रावधान अनुसार 25 लाख रूपये सिक्योरिटी डिपोजिट जमा करने से विफल होने पर माईंडलाॅजिक्स कंपनी के स्वतः अयोग्य होने के कारण कार्यादेश रद्द करके टेंडर में न्यूनतम दर प्रस्तुत करने वाली अगली कंपनी को कार्य आवंटित कर दिया जाना चाहिये था परन्तु कुलपति की माईंडलाॅजिक्स कंपनी के साथ सांठ-गांठ के कारण माईंडलाॅजिक्स का ठेका रद्द नहीं किया गया है। माईंडलाॅजिक्स कंपनी द्वारा गोलमाल करके मेडिकल यूनिवर्सिटी का ठेका हासिल करने के बाद कुलपति के संरक्षण में टेंडर की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन करके अनियमितता की जा रही है।प्रमाणिक दस्तावेजों के आधार पर कुलाधिपति तक पहुंची शिकायत पर की जाने वाली कार्यवाही पर संस्कारधानी की नजर है ,अन्त में उच्च न्यायालय की शरण का मार्ग खुला है।

अभी ये चल रहा है-

  • यूनिवर्सिटी में डिटेल्ड प्रोजेक्ट इंम्पिलिमेंटेशन प्लान जमा किये बगैर कुलपति के संरक्षण में अवैध रूप से प्रोजेक्ट प्रारंभ करके टेंडर की शर्त का उल्लंघन किया गया है।
  • फंक्शनल रिक्वायरमेंट डाक्यूमेंट यूनिवर्सिटी में जमा नहीं करके टेंडर की शर्त का उल्लंघन किया गया है।
  • एवेलबिलिटी एण्ड परफाॅरमेंस रिपोर्ट यूनिवर्सिटी में माईंडलाॅजिक्स कंपनी द्वारा कभी भी जमा नहीं की गई और यूनिवर्सिटी द्वारा कंपनी से सांठ-गांठ करके कभी भी यूनिवर्सिटी द्वारा माईंडलाॅजिक्स के कार्य की मासिक माॅनिटरिंग नहीं की गई।
  • मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा कभी भी माईंडलाॅजिक्स कंपनी के मेथेडोलाॅजी / क्राईटेरिया / लाॅजिक का रिव्यू नहीं किया गया।
  • मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा सर्विस लेवल एग्रीमेंट के मापदंडों की पूर्ति के संबंध में कभी भी माईंडलाॅजिक्स कंपनी का रिव्यू नहीं किया गया।

टेंडर की शर्तो का खुलेआम उल्लंघन-

टेंडर की शर्तोें को खुलेआम धता बताने वाली कंपनी माईंडलाॅजिक्स को  कुलपति,  डाॅ. टी. एन. दुबे द्वारा अपने मात्र 06 माह के अल्प कार्यकाल की अवधि में  संरक्षण देते हुये पांच किष्तों में कुल 1,60,23,426 रूपये (एक करोड़ 60 लाख तेईस हजार चार सौ छब्बीस) का  भुगतान करके एक बड़ी वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिया गया है। इस भुगतान रािश मे से रूपये अस्सी लाख तीन हजार आठ सो निन्यान्वे का भुगतान तो लाॅकडाउन अवधि में युनिवर्सिटी मुख्यालय जबलपुर से अवैध रूप से अनुपस्थित होने पर भी कुलपति, डाॅ. टी. एन. दुबे द्वारा ई-मेल पर अवैधानिक रूप से दिनांक 05 जून 2020 को करने का कारनामा भी किया गया है। यह भी गौरतबल है कि कोविड-19 महामारी जैसे आपातकाल में युनिवर्सिटी मुख्यालय जबलपुर में उपस्थित नहीं रहने के कारण राज्यपाल के द्वारा कुलपति, डाॕ. टी. एन. दुबे कुलपति को बड़ी फटकार लगाये जाने के कारण युनिवर्सिटी की भद भी पिट चुकी है।

ठेका कंपनी ने छुपीई एफ.आई.आर.की जानकारी-
जानकारों का मानना है कि यदि कोई कंपनी एफ.आई.आर. की जानकारी छुपाती है और फिर भी टेंडर हासिल करके टेंडर की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन करती है तो उसके बिलों का भुगतान किस नियम से हो रहा है यह विचारणीय तथ्य है। माईंडलाॅजिक्स कंपनी द्वारा युनिवर्सिटी में बिलों को प्रस्तुत करने के बाद टेंडर की शर्त के अनुसार अनिवार्य परीक्षण नहीं किया जाता है बल्कि खानापूर्ति करते हुये कुलपति के संरक्षण में गोपनीय ष्षाखा द्वारा संतोषजनक कार्य का सर्टीफिकेट जारी करके टेंडर की शर्तों का खुला उल्लंघन करने के बाद भी माईंडलाॅजिक्स कंपनी को कमीशनखोरी करके बिल प्राप्त होने के दो से तीन दिन में ही भुगतान किया जाना कुलपति के संरक्षण में सुनिष्चित किया जाता है।

बिल पास कराने में कुलपति की व्यक्तिगत रूचि-
युनिवर्सिटी के गलियारों में चर्चा है कि माईंडलाॅजिक्स कंपनी का बिल प्राप्त होने के बाद कुलपति, टी. एन. दुबे खुद लेखा एवं गोपनीय शाखा में जाकर फाईल बढ़वाकर भुगतान की प्रक्रिया अपनी देखरेख में करवाते हैं।  यह भी चर्चा है कि माईंडलाॅजिक्स कंपनी की फाईल के संबंध में यदि कोई कर्मचारी टेंडर की शर्तों का उल्लंघन होने की बात करता है तो उसे कुलपति द्वारा प्रताड़ित किया जाता है।

ठेका देने के बाद नहीं सुधरी  व्यवस्थाएं-
माईंडलाॅजिक्स कंपनी के ठेके के पहले यूनिवर्सिटी द्वारा परीक्षा कार्य ऑफ़लाईन कराया जाता था जिसके कारण परीक्षा परिणामों में अत्यधिक विलंब होता था। माईंडलाॅजिक्स कंपनी को परीक्षा कार्य का ठेके देने के बाद उम्मीद थी कि ऑनलाईन मूल्यांकन के कारण युनिवर्सिटी के परीक्षा परिणाम अतिशीघ्र निकलेगें और इस कारण निरंतर धूमिल हो रही छवि में कुछ सुधार होगा परन्तु माईंडलाॅजिक्स कंपनी की खराब कार्यप्रणाली और यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के द्वारा कमीशनखोरी के कारण टेंडर की शर्तों का कड़ाई से पालन नहीं करने के कारण परीक्षा परिणाम अब पहले से भी विलंब से निकल रहे हैं।

छात्र परेशान-
माईंडलाॅजिक्स कंपनी की खराब कार्यप्रणाली के कारण यूनिवर्सिटी के छात्र परीक्षा परिणाम और अंकसूची को लेकर त्राहिमाम कर रहे हैं परन्तु फिर भी कुलपति के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। 

परीक्षा जैसे अति संवेदनशील कार्य में ठेकेबजी-जो कंपनी टेंडर की शर्तों की पूर्ति नहीं करने के कारण अयोग्य हो उससे केवल कमीशनखोरी की दृष्टि से युनिवर्सिटी की परीक्षा जैसा अतिसंवेदनशील कार्य कराना एवं भ्रष्टाचार पूर्वक करोड़ों रूपये का भुगतान करने की घोर अनियमितता को अंजाम देना छात्रों के शुल्क से चल रही मेडिकल युनिवर्सिटी द्वारा छात्रहित के विरूद्ध किया गया कृृत्य है। इस प्रकरण की गंभीरता से जांच कराइ जाये तो एसे कई मामले सामने आ सकते है।

अनुबंध की शर्ते और हमारे सवाल-

  • यूनिवर्सिटी के कार्य का अनुबंध होने के तत्काल बाद प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रोजेक्ट इंम्पिलिमेंटेशन प्लान माईंडलाॅजिक्स कंपनी द्वारा यूनिवर्सिटी में जमा करके प्रोजेक्ट प्रारंभ किया जायेगा क्या ऐसा किया गया?
  • माईंडलाॅजिक्स कंपनी द्वारा फंक्शनल रिक्वायरमेंट डाक्यूमेंट यूनिवर्सिटी में जमा किया जायेगा क्या डाक्यूमेंट यूनिवर्सिटी में जमा किया गया?
  • सर्विस लेवल एग्रीमेंट के मापदंडों के अनुसार माईंडलाॅजिक्स कंपनी द्वारा एवेलबिलिटी एवं परफाॅरमेंस रिपोर्ट प्रतिमाह यूनिवर्सिटी में जमा की जायेगी क्या यूनिवर्सिटी के पास रिपोर्ट जमा की गई?
  • माईंडलाॅजिक्स के कार्य की मंथली माॅनिटरिंग युनिवर्सिटी द्वारा की जायेगी क्या मोनिटरिंग की गई?
  • माईंडलाॅजिक्स कंपनी की मेजरमेंट मेथेडोलाॅजी /क्राईटेरिया/लाॅजिक को मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा रिव्यू किया जायेगा क्या इसका रिव्यू हुआ?
  • सर्विस लेवल एग्रीमेंट के मापदंडों की पूर्ति माईंडलाॅजिक्स कंपनी के द्वारा किये जाने के संबंध में मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा एनुअल रिव्यू किया जायेगा क्या इसका एनुअल रिव्यू किया गया?

इनका कहना है :-


इस प्रकरण में मेरे हिसाब से कोई
अनियमितता नहीं पाई गई सारी चीज़े
वित्त नियंत्रक परीक्षा नियंत्रक और
रजिस्ट्रार के माध्यम से वेरीफाई होकर
आती है, तब मैं आगे कार्यवाही करता हूं।
यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता
पाई जाएगी तो यह लोग जवाबदार होंगे।
– डॉ. टी एन दुबे
(कुलपति-म.प्र.आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय)


किसी भी विषय पर हमें जवाब देने से
मना किया गया आप कुलपति से बात
करे वही आपको जवाब देंगे।
– डॉ. संजय तोतड़े
(रजिस्टार-म.प्र.आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय)

 


उन्होंने इस विषय पर बात करने से
बचने का प्रयास किया कहां मैं क्वारंटाइन
हूँ अभी बात नहीं करूंगी।
– डॉ सविता वर्मा
(परीक्षा नियंत्रक –
म.प्र.आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय)

  

इन्होंने भी अपनी जिम्मेदारी से बचने
का प्रयास किया एक करोड़ 60 लाख
की राशि का भुगतान करने के बाद काले
कारनामों को परीक्षा नियंत्रक के ऊपर
डाल दिया।
– आर एस डिकेट
( वित्त नियंत्रक-
म.प्र.आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय)

 


मैं नया मेंबर हूं पूरी जानकारी लेना अभी
बाकी है जानकारी लेकर हम इस बारे में
आगे बात करेंगे।
– डॉ. राजेश धीरावाणी
(कार्यपरिषद सदस्य
म.प्र.आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय)

[ इस बारे में डॉ परिमल स्वामी, प्रदीप कसार एवं डॉ महोबिया से संपर्क करने के लिए न्यूज़ लाइफ द्वारा अनेक बार प्रयास किया गया पर उन्होंने कॉल नहीं उठाया।]
 

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